और अंग्रेज़ों को पूरे एशिया महाद्वीप व भारत का पहला इंजीनियरिंग कालेज रुड़की में स्थापित करना पड़ा by RoorkeeWeb

और अंग्रेज़ों को पूरे एशिया महाद्वीप व भारत का पहला इंजीनियरिंग कालेज रुड़की में स्थापित करना पड़ा - थॉमसन कालेज ऑफ सिविल इंजीनियरिंग , रूड़की (वर्तमान म IIT रुड़की )


अप्रैल 1842 में अंग्रेज अधिकारी सर प्रोबे कोटले के नेतृत्व में गंगनहर निर्माण हेतू खुदाई प्रारंभ की गई , तथा गंगनहर के निर्माण कार्य व रखरखाव के लिए 1843 में नहर के किनारे canal workshop व Iron foundry की स्थापना की गई |

गंगनहर निर्माण में लगे अभियंताओ व श्रमिको को प्रशिक्षण देनें के उद्देश्य से 1845 ई० में ' सिविल इंजीनियरिंग स्कूल ' स्थापना की गई जिसका नाम 1847 ई० में " थॉमसन कालेज ऑफ सिविल इंजीनियरिंग , रूड़की" कर दिया गया और यह दुनिया में स्थापित होने वाला पूरे एशिया महाद्वीप व भारत का पहला इंजीनियरिंग कालेज बन गया , 1947 ई. में इसकी सेवाओं व महत्ता को देखते हुए इसे विश्वविद्यालय का दर्जा दे दिया गया तथा इसका नाम बदलकर " रूड़की विश्वविद्यालय" ' University of Røorkee' कर दिया गया| 21 सितंबर वर्ष 2001 में संसद में कानून पारित कर भारत सरकार ने इसे देश के 07वें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) के रूप में मान्यता दी|



यह जानकारी क्रियेटिव कॉमन्स ऍट्रीब्यूशन/शेयर-अलाइक लाइसेंस के तहत विकिपीडिया से उपलब्ध है|

 



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